Shant Ras ki Paribhasha-शांत रस – परिभाषा, भेद और उदाहरण – Hindi

By Hari Prasad

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शांत रस का अर्थ और परिचय (Meaning and Introduction of Shant Ras)

शांत रस हिंदी काव्यशास्त्र का एक महत्वपूर्ण रस है, जिसमें मन संसार की असारता को समझकर वैराग्य, निर्वेद और आत्मिक शांति की अवस्था में पहुँचता है। जब व्यक्ति को तत्वज्ञान, मोक्ष की भावना या परमात्मा के वास्तविक स्वरूप का बोध होता है, तब उसके भीतर जो गहन शांति उत्पन्न होती है, वही शांत रस कहलाती है।

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यह रस सांसारिक इच्छा, द्वेष, दुख और राग-आसक्ति से ऊपर उठी हुई मनःस्थिति को व्यक्त करता है। इसी कारण इसे साहित्य में नौ रसों में अंतिम और अत्यंत सूक्ष्म रस माना गया है।

शांत रस की परिभाषा (Definition of Shant Ras)

तत्वज्ञान की प्राप्ति या संसार से वैराग्य के बाद जब मनुष्य के भीतर न सुख की लालसा रहती है, न दुख का बंधन, न राग रहता है और न द्वेष, तब जो शांति प्रकट होती है, उसे शांत रस कहा जाता है।

सरल शब्दों में, जब मन मोह-माया, कामना और चिंता से मुक्त होकर स्थिर हो जाए, तब शांत रस की अनुभूति होती है।

शांत रस का स्थायी भाव (Stable Emotion of Shant Ras)

शांत रस का प्रमुख स्थायी भाव निर्वेद माना गया है। निर्वेद का अर्थ है उदासीनता, विरक्ति या संसार से हटकर देखने की वृत्ति।

कुछ आचार्यों ने शम, तत्त्वज्ञान, सम्यक ज्ञान, तृष्णाक्षय-सुख और वैराग्य जैसे मत भी प्रस्तुत किए, लेकिन शास्त्रीय परंपरा में शांत रस को समझने के लिए निर्वेद और शम दोनों पर विशेष चर्चा मिलती है।

शांत रस के प्रमुख अवयव (Elements of Shant Ras)

  • स्थायी भाव: निर्वेद
  • आलंबन विभाव: परमात्मा का चिंतन, संसार की क्षणभंगुरता, वस्तु-जगत की नित्सारता
  • उद्दीपन विभाव: सत्संग, तीर्थ यात्रा, शास्त्र-अध्ययन, एकांत, साधु-संप्रदाय का सान्निध्य
  • अनुभाव: रोमांच, पुलक, अश्रु, धैर्य, मौन, शांति
  • संचारी भाव: धृति, हर्ष, स्मृति, मति, विबोध, निर्वेद आदि

नवरस में शांत रस का स्थान (Place of Shant Ras in Navras)

भरतमुनि के नाट्यशास्त्र में मूलतः आठ रसों का ही विस्तार मिलता है। बाद के आचार्यों ने शांत रस को नौवें रस के रूप में स्वीकार किया और इसे “नवमो रसः” की संज्ञा दी।

शांत रस की विशेषता यह है कि यह अन्य रसों की तरह बाहरी उत्साह या तीव्र भावनाओं पर नहीं, बल्कि भीतर की स्थिरता और वैराग्य पर आधारित है।

शांत रस पर शास्त्रीय दृष्टि (Classical View on Shant Ras)

अभिनवगुप्त ने शांत रस के विषय में गहराई से विचार किया और इसे स्वतंत्र रस के रूप में स्वीकार किया। उनके अनुसार तत्त्वज्ञान से उत्पन्न निर्वेद इस रस की मूल भावना है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिस तरह अन्य रस अभिनय में आस्वाद्य होते हैं, उसी तरह शांत रस भी रस रूप में अनुभव किया जा सकता है। बाद के अनेक आचार्यों ने भी अपने-अपने ढंग से इसके स्वरूप, स्थायी भाव और अभिव्यक्ति पर विचार किया।

शांत रस के संबंध में प्रमुख मत (Major Views on Shant Ras)

  • कुछ आचार्यों ने निर्वेद को इसका स्थायी भाव माना।
  • कुछ ने शम को शांत रस का आधार स्वीकार किया।
  • कुछ विद्वानों ने तत्त्वज्ञान, सम्यक ज्ञान या वैराग्य को प्रमुख माना।
  • आनंदवर्धन और अन्य आचार्यों ने तृष्णा के क्षय से मिलने वाली शांति की ओर संकेत किया।

शांत रस का महत्व (Importance of Shant Ras)

शांत रस का महत्व इसलिए अधिक माना जाता है क्योंकि यह मनुष्य को आत्मसंयम, वैराग्य, संतोष और स्थिरता की ओर ले जाता है। यह रस केवल भावनात्मक अनुभूति नहीं, बल्कि जीवन की दार्शनिक दृष्टि को भी दर्शाता है।

भक्ति साहित्य, संत काव्य और वैराग्यप्रधान रचनाओं में शांत रस की उपस्थिति विशेष रूप से दिखाई देती है। सूरदास, तुलसीदास और अनेक संत कवियों की रचनाओं में इसकी झलक मिलती है।

शांत रस के भेद (Types of Shant Ras)

शांत रस के भेदों पर सामान्यतः बहुत अधिक विस्तार नहीं मिलता, लेकिन कुछ आचार्यों ने इसके अलग-अलग रूपों की चर्चा की है। रुद्रभट्ट ने रस-कलिका में इसके चार भेद बताए हैं।

  • वैराग्य
  • दोष-विग्रह
  • संतोष
  • तत्त्व-साक्षात्कार

इनमें अंतिम भेद को सर्वमान्य स्वीकार नहीं किया गया।

शांत रस से जुड़े अन्य नाम और कल्पनाएँ (Related Concepts and Ideas)

  • कुछ ग्रंथों में प्रशान्त रस का उल्लेख मिलता है।
  • हरिपाल ने ब्रह्मरस की कल्पना की।
  • भानुदत्त ने कार्पण्य रस का उल्लेख किया।
  • विश्वनाथ ने साहित्यदर्पण में शांत रस के गुण, देवता, आलंबन और उद्दीपन का वर्णन किया।

शांत रस के उदाहरण (Examples of Shant Ras)

शांत रस के उदाहरणों में वे पद और पंक्तियाँ आती हैं, जिनमें वैराग्य, आत्मसमर्पण, संसार की नश्वरता और ईश्वर-चिंतन की भावना स्पष्ट हो।

लम्बा मारग दूरि घर विकट पंथ बहुमार
कहौ संतो क्युँ पाइए दुर्लभ हरि दीदार

जब मै था तब हरि नाहिं अब हरि है मै नाहिं
सब अँधियारा मिट गया जब दीपक देख्या माहिं

इन पंक्तियों में संसारिक अहंकार का त्याग, ईश्वर के प्रति समर्पण और आत्मिक शांति का भाव दिखाई देता है।

शांत रस की विशेषताएँ (Key Features of Shant Ras)

  • इसमें मन शांत, स्थिर और विरक्त होता है।
  • राग, द्वेष, कामना और चिंता कम हो जाती है।
  • तत्वज्ञान और आत्मबोध की भावना प्रबल होती है।
  • यह रस भक्ति, वैराग्य और आध्यात्मिकता से जुड़ा होता है।
  • इसमें बाहरी चंचलता की बजाय आंतरिक स्थिरता मुख्य रहती है।

शांत रस और अन्य रसों में अंतर (Difference Between Shant Ras and Other Ras)

अन्य रसों में भावनाओं की तीव्रता, आकर्षण या संघर्ष अधिक दिखाई देता है, जबकि शांत रस में इन सबका शांत हो जाना ही इसकी विशेषता है। यही इसे बाकी रसों से अलग बनाता है।

जहाँ श्रृंगार, वीर, रौद्र या करुण रस में किसी विशेष भाव की प्रधानता होती है, वहीं शांत रस में भावों का उपशमन और आत्मिक संतुलन मुख्य होता है।

FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

शांत रस क्या है? (What is Shant Ras?)

जब मनुष्य संसार से विरक्ति, वैराग्य और आत्मिक शांति की अवस्था में पहुँचता है, तब जो रस उत्पन्न होता है, उसे शांत रस कहते हैं।

शांत रस का स्थायी भाव कौन-सा है? (What is the Stable Emotion of Shant Ras?)

शांत रस का स्थायी भाव सामान्यतः निर्वेद माना जाता है। कुछ आचार्यों ने शम को भी इसका आधार बताया है।

शांत रस का संबंध किस भावना से है? (Which Feeling Is Associated with Shant Ras?)

इसका संबंध वैराग्य, संतोष, तत्त्वज्ञान, मोक्ष-भावना और आत्मिक शांति से है।

शांत रस के उदाहरण कहाँ मिलते हैं? (Where Are Examples of Shant Ras Found?)

यह भक्ति काव्य, संत साहित्य, वैराग्यप्रधान पदों और आध्यात्मिक रचनाओं में मिलता है।

क्या शांत रस को नौवां रस माना जाता है? (Is Shant Ras Considered the Ninth Ras?)

हाँ, बाद की काव्य-परंपरा में शांत रस को नौवाँ रस माना गया है।

निष्कर्ष (Conclusion)

शांत रस हिंदी और संस्कृत साहित्य का अत्यंत गंभीर तथा आध्यात्मिक रस है। यह मन को सांसारिक बंधनों से मुक्त कर वैराग्य, शांति और आत्मज्ञान की ओर ले जाता है। काव्य में जब राग-द्वेष से परे, निर्वेद और शम की स्थिति उभरती है, वहीं शांत रस का सुंदर रूप सामने आता है।

Hari Prasad

I am P. Hari Prasad , a Lecturer with 12+ years of experience in teaching and content writing. My expertise lies in simplifying complex topics, clarifying doubts, and creating well-researched, accurate articles. As an educator and writer, I strive to provide trustworthy and valuable information to my readers. If you have any questions or need further clarification, feel free to comment below—I’m here to help!

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